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मेने सुना है की सत्य साईं (राजू) के पुनर्जन्म का किस्सा इसकी(राजू की ) पुस्तक में है ! (यधपि मेने इसकी पुस्तक नही पड़ी है )

सत्यनारायण राजू ने शिरडी के साईं बाबा के पुनर्जन्म की धारणा के साथ ही सत्य साईं बाबा के रूप में पूरी दुनिया में ख्याति अर्जित की। सत्य साईं बाबा अपने चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध रहे और वे हवा में से अनेक चीजें प्रकट कर देते थे और इसके चलते उनके आलोचक उनके खिलाफ प्रचार करते रहे।वैसे ये भी एक नंबर का नाटक खोर था !

आज हम लाये है साईं के मुस्लिम होने के कुछ प्रमाण जो की शिर्डी साईं संस्थान, शिर्डी महाराष्ट्र में स्थित है के द्वारा प्रकाशित व् प्रमाणित पुस्तक साईं सत्चरित्र से लिए गये है ,

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यदि वह वास्तव मेँ हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक होता तो उसे मन्दिर मेँ रहने मेँ क्या बुराई थी?

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दिए गये प्रमाणों को आप साईं सत्चरित्र से मिलान कर सकते है, इसके लिए आप शिर्डी की प्रमाणित साईट से इसका मिलान कर सकते है जिसका लिंक नीचे दिया है, मिलान करके आप स्वयं सोचे की क्या ऐसे व्यक्ति को पूजन सही है,

१९१८ – दिनांक २८ सितम्बर को बाबा बहुत बीमार हो गए उन्होंने खाना पीना सब छोड़ दिया और १५ अक्टूबर को वे मर गए.उनके कहे अनुसार उन्हें दफनाया गया.

शिर्डी के मुख्य द्वार पर साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां की कब्र

कई साँईभक्त अंधश्रध्दा मेँ डूबकर कहते हैँ कि साँई न तो हिन्दू थे और न ही मुस्लिम। इसके लिए अगर उनके जीवन चरित्र का प्रमाण देँ तो दुराग्रह वश उसके भक्त कुतर्कोँ की झड़ियाँ लगा देते हैँ।

उसे भगवान कह देना कहाँ तक सही है ?? जबकी इसका जीवन पूर्णतया कर्मशून्य था ! इसी लेख में आप आगे देखेंगे !

१८ वीं और १९ वीं शताब्दी में सभी मुस्लिम फ़क़ीरों को प्रचलित तौर पर “साई” ही बोला जाता था

इसलिए साईं को भगवान् कहता हिन्दू देवी देवताओं का अपमान है,

वर्ल्ड हेअथ ओर्गानैजासन के अनुसार विश्व की ४० प्रतिशत से अधिक लोगों को शुद्ध पानी पिने को नहीं मिल पाता. यदि भगवन पीने के पानी की समस्या कोई समाप्त करना चाहते थे तो पुरे संसार की समस्या को समाप्त करते लेकिन वो तो शिर्डी के लोगों की समस्या समाप्त नहीं more info कर सके उन्हें भी पानी बहार से मांगना पड़ा.

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